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क्या कभी किसी ने ऐसा सोचा होगा ?

कभी सोचा नहीं था, ऐसे भी दिन आएंगें। छुट्टियां तो होंगी पर, मना नहीं पाएंगे । आइसक्रीम का मौसम होगा, पर खा नहीं पाएंगे । रास्ते खुले होंगे पर, कहीं जा नहीं पाएंगे। जो दूर रह गए उन्हें, बुला भी नहीं पाएंगे। और जो पास हैं उनसे, हाथ मिला नहीं पाएंगे। जो घर लौटने की राह देखते थे, वो घर में ही बंद हो जाएंगे। जिनके साथ वक़्त बिताने को तरसते थे, उनसे ऊब जाएंगे। क्या है तारीख़ कौन सा वार ये भी भूल जाएंगे। कैलेंडर हो जाएंगे बेमानी, बस यूं ही दिन-रात बिताएंगे। साफ़ हो जाएगी हवा पर, चैन की सांस न ले पाएंगे। नहीं दिखेगी कोई मुस्कराहट, चेहरे मास्क से ढक जाएंगें। ख़ुद को समझते थे बादशाह, वो मदद को हाथ फैलाएंगे। क्या सोचा था कभी, ऐसे दिन भी आएंगे।। जीएस गुरुजी ऑनलाइन

औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति : --

औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत भारतीय अर्थव्यवस्था अंग्रेजों की शासन की स्थापना से पूर्व भी भारत की अपनी स्वतंत्र अर्थव्यवस्था थी । यद्यपि जन सामान्य की जीविका और सरकार की आय का मुख्य स्रोत कृषि था  फिर भी देश की अर्थव्यवस्था में विभिन्न प्रकार की  निर्माण गतिविधियां होती थी सूती और रेशमी वस्त्रों धातु, मणिरत्न आदि से जुड़ी शिल्प कलाओं के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में भारत विश्व में सुविख्यात हो चुका था भारत में बनी इन चीजों की विश्व के बाजारों में अच्छी सामग्री के प्रयोग तथा उचित स्तर की कलात्मकता के आधार पर बड़ी प्रतिष्ठा थी । औपनिवेशिक शासकों द्वारा रची गई आर्थिक नीतियों का उद्देश्य भारत का आर्थिक विकास नहीं बल्कि अपनी मूल देश की आर्थिक हितों का संरक्षण और संवर्धन ही था । इन नीतियों ने भारत की अर्थव्यवस्था के स्वरूप के मूल रूप को ही बदल डाला और भारत इंग्लैंड के कच्चे माल का पूर्ति करता बन गया तथा तैयार माल का आयात करता बन गया । वास्तविकता यह थी कि उन्होंने कभी इस देश की राष्ट्रीय तथा प्रति व्यक्ति आय का आकलन करने का भी ईमानदारी से कोई प्रयास नहीं किया । लोगों ने निजी स्तर पर...

भारत एक संक्षिप्त परिचय :-

भारत   भारत एक बहुत बड़ा देश है इसकी आबादी 130 करोड़ से भी ज्यादा है । भारत में ज्यादातर गरीब लोग रहते हैं ।भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है । भारत की कृषि अभी उन्नतशील है । भारत निरंतर विकास कर रहा है। भारत में गरीबी का स्तर ज्यादा है , इसलिए भारत में मजदूर वर्ग आसानी से मिल जाता है । कृषक वर्ग जो खेती पर निर्भर होता है, वह खाद्यान्न प्रदान करता है ।भारत एक संपन्न राष्ट्र होने की ओर अग्रसर है । भारत में विविध धर्मों के लोग रहते हैं । सभी धर्मों के लोग आपस में मिल जुल कर रहते हैं । सभी धार्मिक लोग एक दूसरे का सम्मान करते हुए संपूर्ण देश को एकता के सूत्र में पिरोए हुए हैं । भारत एशिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। आबादी के हिसाब से दूसरे नंबर पर है । चीन के बाद भारत की आबादी सबसे ज्यादा है । भारत एशिया महाद्वीप में स्थित है तथा भारत के पड़ोस में चीन,पाकिस्तान,श्रीलंका, म्यानमार , भूटान,नेपाल आदि देश है।

ऑनलाइन एजुकेशन का महत्व

आज का दौर एजुकेशन का दौर है और एजुकेशन की बात होती है तो फिर इस समय टेक्नोलॉजी की बात अवश्य होती हैं और इसीलिए जब टेक्नोलॉजी की बात होती है तो इस समय युटुब और अन्य मीडिया के द्वारा ऑनलाइन एजुकेशन की अवश्य बात होती है और इन साधनों के द्वारा आसानी से अच्छी एजुकेशन प्राप्त की जा सकती है इसीलिए ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन एजुकेशन प्राप्त करना चाहिए और सभी को प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि आज का युग तकनीक का युग है और इस तकनीकी युग में ऑनलाइन एजुकेशन आवश्यक है,इसीलिए सभी को ऑनलाइन एजुकेशन की ओर ध्यान देना चाहिए यदि ऑनलाइन एजुकेशन की तरफ ध्यान देंगे तो इससे हमें बिना किसी परेशानी के अच्छी जानकारी प्राप्त होगी अच्छा ज्ञान प्राप्त होगा और साथ ही साथ हमारे समय और धन का बचत होगी इसीलिए हमें ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन एजुकेशन की तरफ ध्यान देकर इस ऑनलाइन एजुकेशन को प्रोत्साहित करना चाहिए और अपने और अपने समाज का विकास करना चाहिए इसीलिए सब मिलकर ऑनलाइन एजुकेशन को प्रोत्साहित करो और इस प्लेटफार्म से अपने ज्ञान को स्थाई करो। ऑनलाइन एजुकेशन का बहुत बड़ा महत्व इसे समझो और इसे  अपनाओ ।