क्या कभी किसी ने ऐसा सोचा होगा ?
कभी सोचा नहीं था, ऐसे भी दिन आएंगें। छुट्टियां तो होंगी पर, मना नहीं पाएंगे । आइसक्रीम का मौसम होगा, पर खा नहीं पाएंगे । रास्ते खुले होंगे पर, कहीं जा नहीं पाएंगे। जो दूर रह गए उन्हें, बुला भी नहीं पाएंगे। और जो पास हैं उनसे, हाथ मिला नहीं पाएंगे। जो घर लौटने की राह देखते थे, वो घर में ही बंद हो जाएंगे। जिनके साथ वक़्त बिताने को तरसते थे, उनसे ऊब जाएंगे। क्या है तारीख़ कौन सा वार ये भी भूल जाएंगे। कैलेंडर हो जाएंगे बेमानी, बस यूं ही दिन-रात बिताएंगे। साफ़ हो जाएगी हवा पर, चैन की सांस न ले पाएंगे। नहीं दिखेगी कोई मुस्कराहट, चेहरे मास्क से ढक जाएंगें। ख़ुद को समझते थे बादशाह, वो मदद को हाथ फैलाएंगे। क्या सोचा था कभी, ऐसे दिन भी आएंगे।। जीएस गुरुजी ऑनलाइन